सृष्टि की रचना

छः;1द्ध अब्वल सोच अल्लाह,पहल माबुद मनाउ मिटा जिक्र का फिकर,गीत हजरत का गाउ मेरो दिल उमंगे दरयाव,हुकम मुरसद सु चहाउ दौः;2द्ध मुरसद ने अग्या देई,खुलगे ज्ञान बाजार जिक्र मुहम्मद पाक को याय सुनयो कान लगार छः;3द्ध सुनयो कान लगार अमल कुछ याको करले जाने दिनी जान,ध्यान कुछ वाको धरले उतरे चाहे पार,नबी का कलमा भरले…

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षंकर की बात

दौः;1द्ध षंकर सु गोरा कहे,में पिहर कु जाउ तीन दिन की सीख दे,जोगी मैं उल्टी आ जाउ दौः;2द्ध त्रिया की प्रतीत ना,ना मेरे यकीन पिहर कु जब जाण दु,गोरा बचन भरेगी तीन छः;3द्ध वचन भरे है गोरा और सु मै ना बतडाउ छे तीन दिना की सीख फेर उल्टी आ जाउ दौः;4द्ध वचन भरे है…

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मेवात

राजस्थान प्रदेष मे कई प्रकार के जोगी पंथ है। राजस्थान को कई क्षेत्रो मे बांटा गया है जो रजवाडो के समय से ही जाना जाता है। दोहाः- मारवाड मेवाड हाडौती, ढुंढाडी षेखावाटी छः सैक्टर राजस्थान मे ब्रज संग है मेवाती मेवात अंचल पूर्वी राजस्थान के दो जिले अलवर,भरतपुर की कुछ तहसीले आती है जैसे लक्ष्मणगढ,राजगढ,किषनगढ,तिजारा,रामगढ,अ…

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भपंग वादक जहुर खाॅ मेवाती का मेवाती लोक

कला मे योगदान और जीवन परिचय भपंग वादक जहुर खाॅ मेवाती का जन्म 1941 को पिता कंवर नाथ, माता महकबी के कोख से लपाडा जिला अलवर मे हुआ। जहुर खाॅ के पिता जोगिया सारंगी के अच्छे बजवैया थे। बडे भईया सारंगी बजाते थे। सकुर खाॅ बात किस्सा कथा वाचक के रूप मे कहते थे। जहुर खाॅ के पूर्वज- दादा दिलदार, दादा…

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भपंग

भपंग एक डमरू नुमा एक तंतु लय प्रदान लोक वाद्य है। मुस्लिम जोगियो द्धारा षिव रात्री पर षिवालयो मे षिव स्तुति मे बजाया जाता है। भपंग का जन्म भी इस्माईल नाथ जोगी ने किया था। भपंग पहले कडवी लौकी का होता था। जहुर खाॅ मेवाती पहली बार लकडी का भपंग बजाने लगे तथा बकरे के…

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जोगी

जोगी षब्द जुबान पे आते ही ज्ञात होता है की मांग खाकर जीवन यापन करने वाली जाति की बात है जोगी जाति का इतिहास बहुत पुराना है देवो के देव महादेव अपनी तपस्या मे लीन रहते थे। मन मे विचार आया की लीला की जाय,महादेव ने लीला रची।   1 जोगियो की उत्पत्तिः महादेव की…

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चन्द्रावल गुजरी

छः1. खलक फलक बी रचे,रचे तो हरदम वाली सोरू दीन दयाल ज्ञान की खोलो ताली पाख जात करतार सीश्ट षारी का बाला मोकु दियो रब ने ज्ञान खुला ह्दय का ताला दौः2. द्धा पर मे पैदा हुये जन्म लिया है सात षादी किस्सा किषन की सुनो कहु एक गुण चरचा की बात दौः3. बृज भूम बाकी…

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घोडा मेढकी बात

दौ.1. तु कौन पुरख की अस्तरी,कौन तिहारो गाॅव खोटा दिन तेरा लगा, तेने आडो मारो पाॅव दौ.2. मै सोभा सावन साड की,जलपत मेरो गाॅव तहनाड जडाउ पाॅव मे,मेरा पी को टररू नाम दौ.3. छोटी सी तु मेढकी,छोटो सो उरमान मेरो लगे ठकोरो पाॅव को,तेरा तन सु तजे प्राण छ.4. मगरमच्छ तातुन हार गा बाजी मोसु…

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