चन्द्रावल गुजरी
छः1. खलक फलक बी रचे,रचे तो हरदम वाली
सोरू दीन दयाल ज्ञान की खोलो ताली
पाख जात करतार सीश्ट षारी का बाला
मोकु दियो रब ने ज्ञान खुला ह्दय का ताला
दौः2. द्धा पर मे पैदा हुये जन्म लिया है सात
षादी किस्सा किषन की सुनो कहु एक गुण चरचा की बात
दौः3. बृज भूम बाकी बसे ष्याम सिलोना कान
लूटन लग्गो गुजरी जब उ परघट हुयो नादान
छः4. मैं दद बेचन कू चली सुनो ना मेरी भैना
जमना जी के घाट मिली ग्वालन की सैना
दौः5. जमना जी घाट पे बन के बैठो डूट
नन्द महर का ग्वाल ने मेरी दद लीनी सब लूट
छः6. इतनी सुन के बात चटक चन्द्रावल आई
कैसो है उ ष्याम दही तेरी कैसे खाई
दौः7. उ बाडक तु ज्वान ही वाके थप्पड देती चार
हाथ पकड ले जावती नन्द महर के द्धार
दौः8. वाके घना ग्वाल गैले रहा उ भी ना है एक
जमना जी घाट पे काउ दिन सकी तु भी लिजो देख
छः9. रही रात मे सोय रोस मन इनके भारी
घनी सीदोसी उठी हाथ ली जल की झारी
दौः10. दातन मिस्सी लगाय के नैनन के कजरा लिनो सार
लेहगा पहर लियो गुजरात को अंगया मुलकट गोटे द्धार
छः11. झांझन बिछवा पहर पांव की पहरी पायल
देखो चन्द्रावल को रूप सबी पडगी कायल
दौः12. पहरी अंगूठा मे आर सी ओढो दखनी चीर
जैसे शीशी कांॅच की इन को ऐसो बनो शरीर
छः13. दिन की किरण समान बनी चन्द्रावल नारी
चीता को सो लंक लगे जैसे नागन कारी
दौः14. शीश नारयल की गिरी अंखया मोती चूर
चन्द्रावल ऐसी बनी जैसे इन्द्र अखाडे हूर
दौः15. बरसाना की गुजरी मथुरा पथ कु जाय
कैसो है उ श्याम भैना हमने देखो नाय
छः16. माधोबन के बीच श्याम की फिरे दुहाई
ओगन करे अनेक कहे वासू जादू राई
दौः17.काल मिलो हो कन्हीया जमना जी के घाट
दद कु खायगो लूट कर मेरी वाने छाती गेरो हाथ
छः18. सावन की सी घटा गुजरी ऐसे छायी
कोसन को सुमार घाट जमना के आयी
दौः19.हॅू बैन बजाई श्याम ने सिकरा छोटा-मोटा ग्वाल
जमना जी के घाट पे गुजरी जा घेरी गोपाल
छः20. लयी गुजरीया घेर श्याम ने दिनो हेला
छोटा-मोटा ग्वाल बृज का सीकरा घेला
दौः21.मट की शीश उतार दे कहो हमारो मान
दद खाउंगो लूट के अपनी छोडु नही रूकान
छः22. चन्द्रावल ने हाथ दही तोकु केसी खुवाउ
नन्द मेहर के द्धार पकड तोकु ले जाउ
हू तेरी मिले यशोदा माय खुब वापे पिटवाउ
दौः23. तु कान्हा कारो काग सो उंदे हारो चन्द
तोय गढ गोकुल कु ले चलू जहाॅ तेरो बसे पिता हर नन्द
दौ24. तोय अब ना छेडू गुजरी रूहाना बोले बैन
कर मेरा कु छोड दे मेरी फैल जायगी देहन दैन
दौः25. तोय अब ना छोडु कन्हीया कैडी पकडी बांय
बिना मिले ना जशोदा दारीका हरगिज छोडु नाय
छः26. रघु नन्द लियो पकड गुजरी बहुत सिहाई
चोसर गहा फिर गयी घेर लियो जादू राई
दौः27. और मुकट दुबका लियो मुरली लीनी छीन
सरस गुजरी हो गुथी जा दिन किषन कहे आधीन
दौः28. तु कान्हा कारो काग सो चले अनोखी चाल
मै जार पुकारू कंस पे तेरी उडवा दूंगी खाल
छः29. मेने राम लियो औतार लंक मे रावण मारो
लीनो हिरणाकुस की मार रूप नर सींगज धारो
अब किशन लियो औतार देख लू कंश तिहारो
दौ30. असर मार दंू पटक सु मेरो भगत तिरावण हार
तेरा असर कंश सु ना डरू गुजरी बैसक जार पुकार
छः31. किशन बदलगे रूप अमर कर लीनी वारी
देख किशन को रूप हंसे मुख दे दे तारी
कदे खिले ई चन्द्र कदे है ई कान्हा कारो
नख बैसर नथ झटक हाथ छाती पे मारो
दौः32. माथा की बिन्दी डिगी गल को तोडो हार
जोबन लुटो श्याम ने इन को फिको करो सिंगार
दौः33.गुजरी लूटी श्याम ने बोल लिया पाली
लूट-लूट दद खा रहा गुजरी काॅढ रही गाली
दौः34. कोई उतारे मटकया कोई झटके चीर
अॅगया फाडी श्याम ने कर दी छोटी-छोटी लीर
दौः35.गुजरी लूटी श्याम ने रोप दियो है जाल
एक एक दिखे गुजरी उन पे दो दो दिखे है ग्वाल
दौः36.गुजरी लूटी श्याम ने घटो इनन को जोर
छोडी रहा बजार की जब धसी गलीन मे होर
दौः37.गुजरी पहुॅची महल मे बैठी जार उदास
नख बेसर नथ दिखे नही पूछे नू चन्द्रावल की सास
दौः38. जुगनी और चम्पा कली अतः सो वे ही तोय
डाडा खैच और तोडया बहुबल तेरा दिखे तोर है मोय
दौः39. दुलडी तिलडी पचलडी नग वंदन हा और
कहा गंवायो बोरलो बहुबल तेरा दिखे तोर कुतोर
छः40. मेरी सुन री सासु बात बताउ कैसे तोकु
कहू आज की बात सरम तो आवे मोकु
दौः41.जमना जी घाट पे नाय लगाई बार
दद कु खागो छीन के मेरो लूटो सब सिंगार
छः42. इतनी सुन के बात गुजरी सुनमक धायी
लूटी जो जमना जी के घाट सबन कु गैले लायी
पहुॅची महल मे जार जसोदा बैठी पायी
दौः43. मोसु बहुत कहे ही नित कर मैने करो नाय कुछ खियाल
तु अपना कू बरजे नही मेरी तु देख बहुन को हाल
छन्दः44.मोर मुकुट वाले की बंसी बाज रही बाकी धुन मे
मै दद बेचन चली किशन ने लूट लई माधोवन मे
छीना झपटी करी बईया पकड मेरी झटकी
नही छोड तो किशन मुरारी घर चोपट मै-मै पटकी
जवाबःकहे यशोदा सुनो गुजरी क्यो रचती हो तोफान
तम छलयानी बाको गुजरी मेरे पुत्रर है नादान
कहे गुजरी सुनो यशोदा तेरो पुत्रर है छलयान
ऐसा चाटा रखू गाल पे भूल जाय दद का खाना
जार पुकारू कंश राज पे चोट लगी मेरे तन मे
छः45.तेरो कान करे हैरान बृज को होगो बाला
बजे बैन बे ताल हंसे मुख दे-दे ताला
दौः46. मोसु नित कहेवे ही आन कर कियो नाय कुछ ख्याल
तु अपना कु बर जे नही मेरी देख बहुन को हाल
दौः47.सभी ग्वाल भेला हुआ आपस मे बतलाय
गुजरी देगी उलाहना बीरा घर कु कैसे जाय
दौः48.सभी ग्वाल गैले रहे मे तम मे सिरदार
पाॅच सात मेरे संग चलो उन की झुटी करू पुकार
छः49.याने देही लयी खरोट हाथ की हडली गुठी
मेरी सुनो सात के गवाल करू सच्ची की झुठी
लिनो मोर मुकुट दुबकाय हाथ की हडली मुरली
बे कल कर लियो जीव सुरत मेहलण की धरली
दौः50.एक ने इ पद्धी पे लटका लियो मंद-मंद बोले
जार उतारो महल मे कन्हाना नैतर ना खोले
दौः51. हाथ पकड बैठो करो छाती लियो लगाय
रघुनन्द कैसे उन मुनो तेरी पूछे जसोदा माय
दौः52.होर इक्ठ्ठी मे चले जल दिल पे धारे
करे अनीती गुजरी माता मोय भगा भगा मारे
दौः53.कुछ तो तैने कही है इ सुझत है मोय
बिना खोट वो गुजरी बैठा वे की मारे ही तोय
छः54.माधुवन के बीच जार मे दहन चराउ
खेलू डन्डा गींद नीर जमना को प्याउ
मेरो टिकगो टोल गींद गई इनके आगे
इन लयी उठाय घेरली मेने जाके
दौः55.वाय सोप वातू दयी मेरी सुनयो माता बात
जो यू बडी जबर है गुजरी वाने पकडो मेरो हाथ
दौ56.हाथ पकड केडो करो कहा बताउ तोय
चोगर घास घेर के फिर मारण लग्गी मोय
छः57.जावो मेरी शोक लडन कू नाहक आई
इ पुत्रर नादान नार ज्वानी की धाई
चपर लगायो दोस बताओ याकु छैला
इ पुत्रर नादान करे क्या तुम सु सैला
दौः58.एक आवे एक जात है आवे मेरे द्धार
और घनी तो क्या कहॅु तम अपने जावो शहरझार
दौः59.इतनी सुन के गुजरी चली उल्टे बाढ
किशन बजावे बांसुरी उठ के जमना जी के घाट
छः60.याकी बजे बैन बे ताल इसक ने गुजरी घेरी
खडी लखावे दूर कहाॅ बूढी और ठेरी
जुबान करे अरमान घाट जमना के ऐसे
लई इसक ने चुर चले अब घर कु कैसे
दौः61.कान्हा तेरी बांसुरी हुई जीगर के पार
फेर बजा या बैन कु हमारी लेगी चित चुराय
छः62.कान करे हेशन ब्रीज को होगो बाला
याकी बजे बैन बे ताल हंसे मुख दे-दे ताला
बडो हरामी आप खुवार या की मेहतारी
याकी बहन सोहोदरा भगी गैल अर्जुन के कुवारी
दौः63.अब तो हो ई महल मे याका मे ये छीन्दला सब काम
याकी मां दारी है यसोदा है ई दो बापन को जाम
दौः64.लूटी तु जमना जी के घाट पे तेरी मटकी फोडी शीश
सुन चन्द्रावल गुजरी सोउ तेरा रंग महल के बीच
छः65.किशन करे सिंगार बन्ती सूमांग समारी
सिंगार धरो जनानो रूप बनी एक अबला नारी
दौः66.चूहा चसम की ओढनी दरयाई लेहंगा
अंगया रतन जडाव की रब ने रूप दियो मेहें गो
छन्दः67. छलन चले ब्रीज नार,सभी सिंगार,बिछवान की झनकार बनी है।
मृगा नैनी याके नैन बने,तलवार धार सु पैनी है।
चम्पा कली गेंद जब चली प्राण हर लेनी,
नैनो की तिरछी धार नार दुख देनी,
जाने चोटी अजब सुधारी, जैस नागन लटके कारी,
भुज बेलर बैल उतारी, बनी कैसर की सी क्यारी,
श्याम जब नही पिधाता जी,
एक समय महाराज बना लिया भैस जमना जी
छः68.करू क्या गहने की तारीफ सुनेरी पहरो जेवर
झाझर बिछवा पहर पांव की पहरी नेवर
पायल की झनकार कली चम्पा की होती
पहरो छप्पन कली को हार जडा जामे सच्चा मोती
दौः69.छन छाजन और डांॅडया चुडो पहरो बन्द लगाय
हार हमेल हिरा जडी जाणु भंवर लपेटा खाय
दौः70.बदन पसीनो आ गयो जादीन देखी धुप
चन्द्रमा सरमा गये जा दिन देख किषन को रूप
दौः71. रेसम रस्सी हाथ मे ईंढी नंगन जडी
वा कामन का रूप कु त्रिया देखे खडी-खडी
दौः72. लपक झपक पानी भरे जुवाला की सी लोय
के तो रानी रसभा इन्द्र की नातर इ पारबती होय
दौः73. कोन पुरख की स्त्री कोन नगर ब्याही
पिहर तेरो कहान है भैना तु अब कित सू आई
दौः74. मेरो गढ कैसर मुख नगर है नन्द गाॅव ब्याही
नन्द मेहर ही हो नू में पानी कु आई
छः75. इतनी सुन के बात चटक चन्द्रावल नारी
हम तम दोनो बहन लगे वैसे इकसारी
गज घूमे एक ठाय जैसे मे मन्ता हाथी
गल ब्याईयाॅ दी डार मिली छाती सु छाती
दौः76. खउवा सु खउवा मिलो,मिलो गात सु गात
काया तेरी गर्म है सकी तेरा केडा दिखे है हाथ
दौः77. तेरे दूध दही तो खान कु मही जो खतर चीर
मै जमीदार घर ब्याहा दी मेरो जासु सखत शरीर
छः78. पिया पिवे पोस्त भंग नीत की रहे अठालो
कैडा पडगा हाथ काट ते कुट्टी पालो
मेरी उंगली केडी हुयी थपैते मोकु गोबर
रोटी मेला लेर खेत पे जाउ दो बर
दौः79.दुख देवा बालम मिलो ये कर मन की बात
तु दूध बिलो बैठी रहे तेरा नू है कोमल हाथ
छः80. मेरे कब-कब आवे जाय बोलती मिट्ठी बानी
घर मेरे कूचाल करू तेरी मिजमानी
बडी विकट की बात सुनाई तेने मोकु
बुल वा लूगी वाय दुःख ना देसे तोकु
दौः81.नाई ब्राहमण भेज के बुलवा लूंगी वाय
दो बात कहूॅगी समझ की जे वाके कुछ दाये लग जाय
दौः82. सिर गागर गेवर भुजा चले गैन्द गद चाल
आगे-आगे गुजरी जा दिन पिछे हो नन्दलाल
दोः83. मटकी शीश उतार दी पहुॅची महल मे जार
पिंलग नवायो चन्द कु याकु मुढो दियो है डार
छः84.आई याके पास महल की जितनी चेरी
राॅंदें बुरा भात दाल मुंगन की गेरी
मिश्री और मूंगोच और बालू स्याई
लड्डू और जलेब शहर सू गुजरी लाई
दही बढा बी करा कचोरी हदक उतारी
सीरा बैंगन का साग और बैंगन तरकारी
दौः85.पक भोजन ठण्डा हुया लपट बगड जु जाय
ताता सीला जल धरा आजा दोनु भैना नहाय
छः86.मेरो ऐसो खुनी पिव आंख मांडा छाती ने
मेरे घरे निर्मल नीर सकी मैं हू नहाती ने
दौः87.जी न चहावे नहान कु पानी न मांगे अंग
तेरे मानस घर घणा सकी मैं कैसे नहाउ संग
छः88.ताता जल सु नहाय मजल सु आई हारी
तेरी फेरू पिट पे हाथ जल गैरू भर झारी
दौः89.जल मंझण या देह को हल बो होय शरीर
आ भैना भोजन करे तोकु थाल परोस खीर
दौः90.थाली छन्नी कटोरा भोजन दिये सिलाय
घी गैरे ही गुजरी जा दिन किशन बैठ कर खाय
दौ91.मन मुलके हिवडो हंसे खुशी हुए ब्रीज लाल
छल मे लेली गुजरी अपना पूरा करू सवाल
छः92.याने दियो रिवाडो मूंद चलो है गुजर घर कू
देखे निंगाह पसार सोच तो आगो नर कु
दौः93.12 मण को घेसडो सवा शेर और धौण
दरवाजा घेरी खडो बताई नई नार है कौण
छः94.पी तम रोटी जेयो गुजरी बोली हेटी
मेरी है यू बहन सभी काका की बेटी
दौः95.नाजुक जी कोमल बदन चलत रहा हारे
याको मन भर के हो मिलन कू आई है मिलणा के मारे
दौः96.उल्टो जाउ खरक पे दे रोटी पहुॅचाय
मोकू डर है जैर को मेरी ब्याई झुमर गाय
दौः97. तु आप ही आयो खरक पे गुजर बोलो बात
रोटी कभी ना जीम सू कदी तु भेजे और के हाथ
दौः98. तोसक तकया गिन्दवा दियो ंिपंलग पे गैर
तु बैठी रही यो है सकी इतने मे आउ रोटी दैर
छः99. पी तम रोटी ज्यो कहो तो धर के जाउ
आई मेरी बहन जाय कर वाय सुलाउ
दौः100. आग लगे तेरा काम मे मोय सरेना दिन रात
मेरी बेहना आई मिलन कु वासु मन की पूछी ना बात
छः101.तेरी बहन बडी बलवान बताई तोसु छोटी
मर्दन की सी भुजा लगे है पिन्डी मोटी
दौः102.निरख परख जाॅजु घनो देखो जमना जी के घाट
बहन भरोसे मत रहे ये है काना का सा ठाट
दौः103.पी तम पापी ओड का तोय का नाय खबर
उत्तम हमारो देष है हॅू को पानी घणो जबर
दौः104.आगे-आगे गुजरी पिछे गुजर जाय
गुजरी घुसगी महल मे बाहर याने दिना कान लगाय
छः105.दिनी सेज बिछाय सोन की करली त्यारी
बस्तर धरे उतार सैज पे आजा प्यारी
लेंहगो दिनो खोल बन्ध अंगया के खोले
तु आजा मेरी बहन किषन सु गुजरी बोले
दौ106.घणा दिनन मे तु मिली आजा मेरे पास
ऐसे तन बस्तर तू खोल दे जासु दोनु सोवे सात
दौः107.नहाउगा बस्तर खोलकर ना मैं सोउ दीपक बाल
जा दिन मे नंगी सोजाउ सैज पे मोय दिखे आल जनजाल
दौ108.बुरा घोलो दुध मे भर-भर देय गिलास
दोनू सोया सैज पे किषन गुजरी पास
छः109.चो मुख पे फेरो हाथ नींद गुजरी कु आई
लेहंगो कर दियो दूर ओढनी परे बगाई
माथे धर लियो मुकुट फुंक मुरली मे मारी
खुलगी याकी आंख खडो कान्हा ओतारी
दौः110.कान्हा तेरा छलन की खबर पडी ना मोय
पी बरजी मानी नही अब तो होन हार सी होय
छः;111द्ध मेरी सुन कन्हीया बात गुजरी खडी पुकारे
गोतम ऋशि की नार इन्द जाके पहुॅचो द्धारे
हर की सीता लयी चुलाय बने रावण अधिकारी
घटो बाल को जोस तकी वाने पर नारी
दौः;112द्ध पर नारी का तका सु घटे राज को तेज
सन्तन की भगती घटे चन्द्र होय मलेच
छः;113द्ध क्या त्रिया की जात सुनो पाखती हेती
षिव षंकर कु छोड भिनी भस्नागर सेती
दौः;114द्ध मिली अहिंसा इन्द्र सु सीता ने तोडी कार
कीचक सु मिली ही सीलन्द री हो ये चारू नार कु नार
छः;115द्ध डोले जात कु जात वचन तु आके कुडाॅ
षिव जी जातो नाय,नाय वाके देतो चूडाॅ
गउ पराक्षत चढो अहिला दोस लगायो
रावण हो हैवान खोलकर कला घटाई
दौ;116द्ध मिली अहिला इन्द्र सु वाकी हर सु हुई पीछाण
पहले छेडी सोलन्द्री न ूवो कीचक होगा घाण
दौ;117द्ध झट का पटकी हो रही मचो महल मे फाग
गुजर तन बाकी नही जा दिन जलो जाय बिन आग
छः;118द्ध गुजर सोच विचार बगद के उल्टो आयो
महल दियो है मुंद षहर मे षोर मचायो
दौः;119द्ध बनो जगाती ष्यामरो दद को मांगे दान
दिल सकीया लायो नही मेरा घुसो महल मे आन
दौः;120द्ध बिंगन बटेगो नन्द सु जे गेरो याय मार
हम तो घेरे महल कु तु लाय ने कंष चढार
छः;121द्ध आधी रात निखण्ड कसो गुजर ने घोडा
मृग डाक भर जाय बांस धरती को घोडा
दौः;122द्ध धरती को बासो तजो घोडा चलो अतोल
पहुॅचो आधी रात मे दिनो दरवाजा पे बोल
दौः;123द्ध दरवाजा पे उ खडो लम्बी मारे हेर
जो सु जन्मो देव की राखो बरसाना मे घेर
दौः;124द्ध भनक पडी ही कंष के कानन गई आवाज
कौन सक्स हेला दिए कहा तिहारो काज
छः;125द्ध यही हमारे काज तेने क्या मन मे जाणी
चढो देव के संग जुडी अंगासी बाणी
दौः;126द्ध जाने तोसू जब कही वही कहे है आज
बरसाना मे किषन है तु जा सादे ने काज
दौः;127द्ध सभी देव भेला हुए सदे काज सारे
ऐसा है कोई दल मे जो काना कु मारे
छः;128द्ध लगो असर को दाव चढी गुजर की पैडी
आधी रात निखण्ड कंष की जुडी कचेडी
दोः;129द्ध संख्या सुर दानो कहे सुनो अर्ज महाराज
आज्ञा हम कु दिजियो तेरा हम सारेगां काज
छः;130द्ध हुक्म कंष ने दियो चढे संख्या सुर दानो
देव डिगम्बर चढो जोधया बढो अमानो
चिण्ड कुण्ड मिस्कुण्ड जोधया वो भी भारी
चढगो हाथी कबनयां लेर संग ले सैना सारी
अन्न गिनत सामत सूरमा चढे बुहतेरा
चढगी बृहत मान की फौज करा महलन का घेरा
दौः;131द्ध महलन का घेरा करा उघनते प्रभात
हूॅ बी दिन दुब का लियो किषन ने कर दी तीन दिना की रात
दौः;132द्ध वाॅ काना की बांसुरी बाजी बिसवा बीस
कैलाषन खुडको हुॅयो जा दिन जगा कोट तेंतीस
छः;133द्ध याके नारद मन हो पास किषन ने वेद पठायो
गहजा कैलाषन की गैल बुला षिव षंकर लायो
धोलागढ कु जाय जहाॅ की ज्वाला रानी
लायो इन्द बुलाय मेघ भर लावे पानी
जायो लोक पताड जहाॅ के बासक राजा
कोंता के सुत पाॅच सरेगा उन सु काजा
दौः;134द्ध गढ गोकुल कु जाए के लायो गहरी सजा बरात
नोतारी मत भुलयो लायो सब भाईने साथ
छः;135द्ध नारद मन बी चलो गैल पर्वत की लीनी
पोन सरूपी बनो खबर षिवजी कु दिनी
दौः;136द्ध कसो खढो हो नान्दयो गौरा लीनी लार
सुन काना की बांसुरी जा दिन आप हुऐ है प्यार
दौः;137द्ध किषन खंदाया हम चला लीनी या पर्वत की गैल
तोकु नोतो किषन को गुण्डा कितलु हेंको बैल
दौः;138द्ध या पर्वत कैलाष मे सुनगी मुरली धर की टेर
हुक्म बना हाजर खडा अपनो बैल नान्दीया लेर
दौः;139द्ध कैलाषन का जोगया सुनो हमारी बात
इनकु बी मत छोडयो ले चल ते तीसन कु सात
दौः;140द्ध पंडित बरजी कर रहे तो देवी के द्धार
तो कु नोतो किषन को कैसे बैठी आसन पार
दौः;141द्ध सुनयो देवी देवता ले-ले खडक दुधारो हाथ
कैरू भैरू पी मत छोडयो ले-ले छप्पन कलवा सात
दौः;142द्ध पातर नाचे इन्द्र के ताल बजावे बीर
सभी देव भैढा हुया याका लेय वचन आषीर
दौः;143द्ध आ नारद मन बैठ जा तेरी लयी राम ही राम
आधी रात निखण्ड पे बीरा आयो है क्या काम
दौः;144द्ध किषन पकड लियो कंष ने वाके जड दिना ताला
तु चढ चल दल मे अपनी लेर मेघ माला
दौः;145द्ध मै भी आउ जो डट सु नही लेकर माला हाथ
बरसाना का खेत मे मै भी लडू किषन के साथ
दौः;146द्ध नारद मन हुॅ सु चलो लेकर इन्द्रासन को भाव
पहुॅचो लोक पता लमे बैठो पायो बासक राव
दौः;147द्ध देख बिपर का रूप कु बालक हुए हरे
नारद मण से जोधया तम ने कितकु चरण धरे
दौः;148द्ध जंग जुडे भारत मरे मोकु इन बातन को चाव
ले नोतो किषन को तु बी चढ चल बासक राव
दौः;149द्ध नारद मण हुॅ सु चलो बैठो मिलो डूहीटल बैन
याकी खिजामत मे अर्जन खडो याकी रामा किषन लैन
दौः;150द्ध राम-राम तेरी लई आ नारद मण बैठ
खैर खुसी केह किषन की जे तु हॅू सु आयो ठैट
छः;151द्ध मेरो ना बैठन को काम जंग की मोपे झन्डी
चलो तम पाॅचु भाई साथ बाण तो बाध कमन्डी
दौः;152द्ध बरसाना का खेत मे आया पाॅचु भाई सात
मैं जाउ हर नन्द पे वाकी लाउ सजा बरात
दौः;153द्ध जंग जुडा भारत मरे बरसाने के खेत
तम कु नोतो किषन को चढ चलो ब्रहमा विश्णु महेष
दौः;154द्ध नारद मण हूॅ सु चलो उडो पोन के साथ
इन्द मचायो षहर मे समत आधी रात
दौः;155द्ध वाय गुजरी लेगी पकड के नाय हील मानी
चन्द्रावल का महल में तेरो घिरगो रजधानी
दौः;156द्ध नन्द महर तम सु कहॅु तम एक बात राखो
जावो किषन छुडाय के करो तम बरसाने साको
छः;157द्ध चडे नन्द उपनन्द बोल जब दियो जसोदा
बांधा बाण कमाण देव तो सुण कर कुदा
ग्वाल बाल बी चढे बगल तो कुरी लगाई
कौता के बल बण्ड चढे वे पाॅचु भाई
दौः;158द्ध चोरासी और नो चढा बस्ती बिस्वाबीस
श्री किषन की कुमक पे जा दिन चढा कोट तेंतीस
छः;159द्ध हर की चढी जनेत बनातो पहॅुचो आगे
बल देवा बी चढे संग षिव जी बी जाके
चढगो ब्रहमा चक्र लेर हाथ हडमत ने मैला
चढगो बासक राव भरा सर्पन का ढेला
दौः;160द्ध सुन्दर सवारी चांेगनी हस्ती साठ हजार
घोडा 68 लाख हा उन का दल मे नाय सुमार
दौः;161द्ध विश कर माडे गढ रचे ओडी खाई देर
पहरो बासक राव को चोकी बैठा दियो फेर
दौः;162द्ध सुरमान के सिर नही मत कोई मरना सु डरयो
पहले किषन छुडाय के फिर कोई और काम कु करयो
दौः;163द्ध वा कौंता का भीम ने दियो महल ढहाय
कान्हा दिन कु छोड दे जासु जेत खम गढ जाय
दौः;164द्ध वा कौंता का भीम ने मारो संख्या सुरदानो
देव डिगम्बर चढ गयो जोधा उ बी मरदानो
छः;165द्ध अर्जन दिनो बाण देव जब गिरो डिगम्बर
छाना याका होगा कई हजार गरद सु राचे अम्बर
दौः;166द्ध गढा गैर दी भीम ने याका हाथ गयो है हार
एक-एक सु सो-सो बने अर्जन इनको कहा बीचार
दौः;167द्ध कारल मल दानो चढो कांपा कोट महल
बासक बी भों खा गयो पडगी तेंतीसन चल
दौः;168द्ध तोय ओंडी मे सुमरू करू मैं अर्जन आधीन
ही असर अमायी कर रहो या रब मदद करे ना हीन
दौः;169द्ध ठेर सुणी अल्लाह ने हॅु अर्जन आधीन
दाना बी गरकन लगा रब ने करदी मोम जमीन
छः;170द्ध ओडे याके इन्द राजा बी लडो मेह याने बरसायो
दाना कर दिना छोमान बहुत सो जंग मचायो
बगदो बासक राव हुकम याने फरमायो
छोडा पोनयाॅ नाग सुत दल सारो खायो
दौः;171द्ध कंष भगो दल छोडकर गुजर लिनो मार
खुषी कैन्हया हो रहे जीती उ चन्द्रावल नार
छः;172द्ध जीती उ चन्द्रावल नार बगद कर उल्टे आये
तोख दियो हो जो जमना जी घाट वचन वो सभी निभाये
दौः;173द्ध सुन चन्द्रावल गुजरी मेरा सभी सरा है काम
तोख दियो हो घाट पे बतायो तेने दो बापन को जाम
छः;174द्ध तु दिखत को नादान बडो काना औतारी
मेरी बहना बन के गयो करी महलन मे खुवारी
दौः;175द्ध सुन काना तोशु कहुॅ मती करे लाचार
मै हुॅ तेरी स्त्री तु मेरो भरतार
छः मेरो नगर ग्वालदाॅ गाॅव बनी कैसर की क्यारी
नेता होय हमेषा रही सच्ची सरदारी
दौः बरसाना की गुजरी मथुरा गढ को कान
जमना पे झगडो हुयो षादी षायर करे बयान
दौ: झुट साॅच की खबर ना ज्ञान सुनो जैसे दरसायो
षादी ने चर्चा कथी ज्ञान हमने सल्ला सु पायो


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