षंकर की बात

दौः;1द्ध षंकर सु गोरा कहे,में पिहर कु जाउ
तीन दिन की सीख दे,जोगी मैं उल्टी आ जाउ
दौः;2द्ध त्रिया की प्रतीत ना,ना मेरे यकीन
पिहर कु जब जाण दु,गोरा बचन भरेगी तीन
छः;3द्ध वचन भरे है गोरा और सु मै ना बतडाउ
छे तीन दिना की सीख फेर उल्टी आ जाउ
दौः;4द्ध वचन भरे है गोरजा मिला हाथ सु हाथ
आउगी डट सु नही जोगी दिल मे थियावस राख
छः;5द्ध गोरा हु सु चली छुटी पिहर कु धाई
काकी ताई मिली,मिली चन्द्रावल माई
दौः;6द्ध काका ताउ सब मिले,मिलो कुटम्ब परिवार
हुई खुषाली षहर मे,गोरा आई राजकुमार
छः;7द्ध षंकर वापे सोच लटा पहले दुबकाई
याने धरो मोचडी भेश,मोचडी हदक बनाई

दौः;8द्ध मोची को खिलको लियो धरो मोचडी भेश
गठडी खोली बीच बाजार मे हिमालय के देष
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छः;9द्ध चेली चांटी चली गोरजा जार सुणाई
मोची एक उतरो बीच बजार,मोचडी हटक बनाई
दौः;10द्ध मोची को है छोकरा,वाके उगती आवे मुंछ
दिल ललचोहो गोरजा,करी महल सु कुंच
दौः;11द्धमोची का रे छोकरा,कहदे इनको मोल
मुंह मांगा तो दाम दु,झुट रती मत बोल
छः;12द्ध जडे इनमे निलम और पुखराज जडे सच्चे से मोती
तेरी सब नगरी को माल महल का करू भरोती
दौः;13द्ध ये जोडी भी ने घडी,घडी जो अपने हाथ
उ पहरेगी मोचडा त्रिया जो चले हमारे साथ
दौः;14द्ध कोल करा दिन तीन का,बीत गये दिन साथ
वा पर्वत कैलाष मे मेरी षंकर जोहे बाट
दौः;15द्ध जा बेटी घर आपणे,कर षंकर की गोर
मिहर हमन पे राखियो,कदी फेर बगदयो ओर
छः;16द्ध लीनी दखनी चीर कसुमर साडी लीनी
आई बीच बजार सैन मौची कु दीनी
दौः;17द्ध आगे आगे गोरजा,पिछे षंकर जाए
जब बाहर हुयो हो षहर सु दिनो षंख बजाए
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दौः;18द्ध तु छल गीरा जोगना तेरो सब छल भरो षरीर
मोपे डारी मोहनी तेने पहले बिठा दिये है बीर
छः;19द्ध मेरे रही काम की नाय नेह तो तोसु टुटा
करा तेने तीन दिना का कोल वचन तेरा पडगा झुटा
दौः;20द्ध हॅू सु आई कोल कर ही तेरो डिगो इमान
जात-पात पुछी नही तेने मोची डुंढो ज्वान
छः;21द्ध गोरा हॅु सु चली गैल पर्वत की पकडी
धुणा पानी पेय बिणती डोले लकडी
दौः;22द्ध पलक उठावे षंकरा मन मे हुयो खुषहाल
तोय मैं पर्वत की राणी करू भीलणी राख हमारो सवाल
दौः;23द्ध मोकु दुख भरतार को नु मन तजो गरूर
तेरा घर मे जब रहु जब करे भेंख कु दुर
छः;24द्ध थैला मै सु लेर कतरनी षिव ने काढी
कतरो अपने हाथ फिरो मत आढी आढी
दौः;25द्ध ये ले कीना कतरनी,कतरो अपणे हाथ
भेख उतारो भीलणी,तोसु कह षंकरा बात
दौः;26द्ध मोपे ना आवे कतरते,कतरो अपने हाथ
भेख उतारो षंकरा तम सु कहे भीलणी बात
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दौः;27द्ध सुण जोगी तोसु कहु,अब ना करसु प्यार
तेरा घर मे जब रहॅु जब लावे गोरजा नार
छः;28द्ध खेंचा तंग तनाव,जब ही धरती डगयाई
गोरा पोन सरूपी बनर बाग मे पहले आई
दौः;29द्ध आतो देखो षंकरा, याने लीनो देख
मै तोसु पुछु जोगना,तेरो कहाॅ धरो भेख
छः;30द्ध मेरो घटो नाड को जोष फेर ना डटे बहाली
टुकडा वाको करू ले चलु वाकी घाली
दौः;31द्ध खट दर्षन भेडा हुआ हुॅ तेरी लगरी बाट
मेरी रोटी जब लगे जब चले हमारे साथ
छः;32द्ध सुणयो बुढा नाथ झुट नाहक कु बोले
खट दर्षन की बीच कपट मत राखो ओले
दौः;33द्ध इ ले तेरी कतरनी,याकु ले पिछाण
तेने पिहर मे मेरो मन छडो,नु मेरे तेरी करी तपस्या हाण
दौः;34द्ध दोनु एक सा हो गया घटगी दोनुन की हेसीत
सादल्ला संसार मे मत करयो या त्रिया की प्रतीत

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