Lok Katha
सृष्टि की रचना
छः;1द्ध अब्वल सोच अल्लाह,पहल माबुद मनाउ मिटा जिक्र का फिकर,गीत हजरत का गाउ मेरो दिल उमंगे दरयाव,हुकम मुरसद सु चहाउ दौः;2द्ध मुरसद ने अग्या देई,खुलगे ज्ञान बाजार जिक्र मुहम्मद पाक को याय सुनयो कान लगार छः;3द्ध सुनयो कान लगार अमल … Read More »
षंकर की बात
दौः;1द्ध षंकर सु गोरा कहे,में पिहर कु जाउ तीन दिन की सीख दे,जोगी मैं उल्टी आ जाउ दौः;2द्ध त्रिया की प्रतीत ना,ना मेरे यकीन पिहर कु जब जाण दु,गोरा बचन भरेगी तीन छः;3द्ध वचन भरे है गोरा और सु मै … Read More »
चन्द्रावल गुजरी
छः1. खलक फलक बी रचे,रचे तो हरदम वाली सोरू दीन दयाल ज्ञान की खोलो ताली पाख जात करतार सीश्ट षारी का बाला मोकु दियो रब ने ज्ञान खुला ह्दय का ताला दौः2. द्धा पर मे पैदा हुये जन्म लिया है … Read More »
घोडा मेढकी बात
दौ.1. तु कौन पुरख की अस्तरी,कौन तिहारो गाॅव खोटा दिन तेरा लगा, तेने आडो मारो पाॅव दौ.2. मै सोभा सावन साड की,जलपत मेरो गाॅव तहनाड जडाउ पाॅव मे,मेरा पी को टररू नाम दौ.3. छोटी सी तु मेढकी,छोटो सो उरमान मेरो … Read More »

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